हनुमान जी का न्याय

नमस्कार दोस्तों। हिंदी किस्से कहानियाँ में आपका फिर से स्वागत है। आज की कहानी है एक ऐसे सीधे-साधे इंसान और एक चालाक सेठ की, और इन दोनों के बीच में थे स्वयं बजरंगबली। तो सुनिए, ये छोटी सी पर सीख से भरी कहानी।

एक गाँव में रहता था गोपाल। बहुत ही सीधा-सादा और ईमानदार इंसान। उसके पास थोड़ी सी जमीन थी, जिसे जोतने के लिए उसे एक बैल खरीदना था। पैसे नहीं थे, तो उसने गाँव के सेठ जगन्नाथ से पचास रुपए उधार लिए।

महीना भर बाद, जब फसल तैयार हुई, तो गोपाल खुशी-खुशी सेठ के पास पहुँचा। उसने न सिर्फ पचास रुपए लौटाए, बल्कि सेठ की मेहरबानी के लिए उसे मिठाई का डब्बा भी भेंट किया।

पर सेठ था बड़ा ही कंजूस और लालची। उसने सोचा, “क्यों न इस भोले-भाले आदमी से और पैसे ऐंठ लिए जाएँ?” उसने पैसे लेते हुए कहा, “गोपाल, ये तो बस ब्याज है। अब असली पचास रुपए तो लौटा।”

गोपाल (बेचैनी से): “सेठ जी, ये क्या कह रहे हैं? मैंने तो आज ही आपके पचास रुपए लौटाए हैं।”

जगन्नाथ (घमंड से): “सबूत? कहाँ है तुम्हारा सबूत? कोई गवाह है क्या?”

बेचारा गोपाल बिलख-बिलख कर रोने लगा। आखिरकार, दोनों का मामला गाँव के हनुमान मंदिर में पहुँचा। गाँव के बुजुर्ग बोले, “चलो, पूछते हैं हनुमान जी से। वो तो सच के साथ खड़े होते हैं।”

सबने मिलकर हनुमान जी की मूर्ति के सामने प्रार्थना की। एक बुजुर्ग बोले, “हे पवनपुत्र। आप ही बताइए, इन दोनों में से कौन सच कह रहा है? कल सुबह जिसका हार आपके गले में होगा, वही सच्चा होगा।”

अगली सुबह, पूरा गाँव मंदिर में जमा हुआ। सबकी निगाहें हनुमान जी के गले पर टिकी थीं। और वहाँ… एक सुनहरा हार चमक रहा था।

सेठ जगन्नाथ खुशी से झूम उठा। “देखा। हनुमान जी ने मुझे हार पहनाकर सच्चा ठहराया।” और वह हार पहनने के लिए आगे बढ़ा।

पर तभी, बुजुर्ग ने उसका हाथ पकड़ लिया और गंभीर स्वर में कहा, “रुको सेठ। हनुमान जी ने तुम्हें सच्चा नहीं, बल्कि तुम्हारी चालाकी का इनाम दिया है। ये हार इसलिए है क्योंकि तुमने कल रात चुपके से आकर इसे पहना दिया, ताकि तुम्हें सच्चा बताया जाए। सच्चा तो वही है जिसने कुछ नहीं किया। सच्चा तो गोपाल है।”

सेठ का सिर शर्म से झुक गया। उसने अपना अपराध स्वीकार किया और गोपाल से माफ़ी माँगी।

सीख यही है दोस्तों, सच्चाई की जीत हमेशा होती है। चाहे दुनिया कुछ भी कहे, ऊपर वाला सब देख रहा होता है।

दोस्तों, कैसी लगी आपको यह कहानी? कमेंट में जरूर बताइयेगा। और हाँ, अगर आपको ऐसी ही दिलचस्प कहानियाँ पसंद हैं, तो हमारे चैनल ‘हिंदी किस्से कहानियाँ’ को सब्सक्राइब जरूर करें। बने रहिए ऐसे ही, नई कहानियों के साथ। तब तक के लिए नमस्कार। जय हनुमान।

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