एक नदी के किनारे, एक बुढ़िया अकेली रहती थी। एक दिन, उसने देखा कि नदी से एक तरण बह रहा है। उसने उसे बाहर निकाला और देखा कि यह एक सुंदर तितली है। बुढ़िया ने सोचा कि उसे तितली को बचाना चाहिए। उसने तितली को एक बोतल में बंद कर दिया। अगले दिन, बुढ़िया एक पहाड़ी पर गई। उसने बोतल खोली और तितली को बाहर निकाला। तितली उड़ने लगी, लेकिन कुछ ही पलों में गिर गई और मर गई। बुढ़िया बहुत दुखी हुई। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने समझा कि तितली को स्वतंत्र रहना चाहिए था।
नैतिक शिक्षा। इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें दूसरों को स्वतंत्रता देनी चाहिए। उन्हें अपनी गलतियों से सीखने दें। जब हम उन्हें बांधकर रखते हैं, तो वे कभी विकसित नहीं हो सकते। हमें दूसरों के जीवन में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
