बगीचे में एक छोटा सा पेड़ था, जो बड़े पेड़ों को देखकर बहुत ईर्ष्या करता था। वह उनसे कहता, “काश, मैं भी तुम्हारी तरह ऊँचा और मजबूत होता!”
बड़े पेड़ हंसते हुए कहते, “धैर्य रखो, छोटे। समय के साथ तुम भी बड़े हो जाओगे। तब तुम्हें पता चलेगा कि ऊँचा होना ही सब कुछ नहीं है।”
कुछ सालों बाद, छोटा पेड़ बड़ा हो गया। अब वह बगीचे में सबसे ऊँचा पेड़ था। लेकिन, उसे जल्द ही एहसास हुआ कि बड़े होने के अपने नुकसान भी हैं। तेज हवाओं में उसे ज्यादा डर लगता था और पक्षियों के घोंसले बनाने के लिए भी उपयुक्त जगह नहीं मिल पाती थी।
अंत में, छोटे पेड़ को समझ आया कि हर चीज की अपनी खासियत होती है। सबसे बड़ा होना जरूरी नहीं, बल्कि अपनी जगह खुश रहना जरूरी है।
नैतिक शिक्षा। हर किसी की अपनी खूबियाँ होती हैं। दूसरों से अपनी तुलना करने के बजाय, अपनी खूबियों को पहचानें और खुद पर गर्व करें।
