चंचू नाम की चिड़िया पेड़ पर रहती थी। वह हमेशा आसमान में उड़ने का मज़ा लेती। एक दिन, उसने नीचे झील में सुनहरी मछली, सोना, को देखा।
चंचू ने सोना को पुकारा, “सोना, तुम पानी में ही क्यों रहती हो? आजमाओ न, मेरे साथ उड़कर देखो दुनिया कैसी है!”
सोना ने हंसते हुए कहा, “चंचू, तुम्हें पानी में तैरने का मज़ा नहीं समझ आएगा। यहाँ मेरा घर है।”
चंचू को समझ नहीं आया। उसने कहा, “पानी में तो कुछ नहीं दिखता होगा। आसमान से सारे जंगल, पहाड़, नदियाँ – सबकुछ दिखाई देता है।”
सोना ने समझाया, “तुम आसमान की खूबसूरती देखती हो, मैं पानी की। हर जगह देखने के लिए कुछ न कुछ होता है।”
चंचू को सोना की बात सच लगी। वह पेड़ पर वापस बैठ गई और सोचने लगी कि हर किसी को खुशी अलग-अलग चीज़ों में मिलती है।
नैतिक शिक्षा। हर किसी की पसंद अलग-अलग होती है। दूसरों को उनकी पसंद के लिए सम्मान देना चाहिए।
