कहानी का आरंभ हुआ था, जब सूरज और चाँद एक-दूसरे से नाराज़ हो गए। सूरज ने कहा, “मुझमें तो पूरा जीवन चमकना है। तुमसे क्या सीखना?” चाँद ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, “तुम्हारी चमक में ही तो मेरी पहचान है।” उस दिन सूरज और चाँद ने दोस्ती का सच समझा, और उनकी मित्रता में नई मज़बूती आई। सूरज को भी अब यह एहसास हुआ कि उसकी चमक में ही चाँद की सुंदरता का रहस्य छिपा है। इस घटना ने सिखाया कि हर व्यक्ति का अपना महत्व होता है, और एक-दूसरे के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना जीवन में सफलता की कुंजी है।
