मोटू नाम की एक चालाक बिल्ली थी। वह पेड़ पर रहने वाली चिड़ियों को देखकर अक्सर सोचती कि उन्हें कैसे पकड़ा जाए। एक दिन, उसने पेड़ के नीचे बैठकर चिड़ियों को गाते हुए सुना।
मोटू ने सोचा, “चिड़ियाँ मेरी बातों में आ जाएं, तो मैं उन्हें आसानी से पकड़ सकती हूँ।” वह ऊँची आवाज़ में बोली, “चिड़ियो, तुम कितनी खूबसूरत हो। तुम्हारी आवाज़ भी बहुत मीठी है। काश, मैं भी तुम्हारी तरह पेड़ों पर रह पाती।”
चिड़ियाँ मोटू की बातें सुनकर आपस में चहचहाने लगीं। एक चिड़िया नीचे आई और बोली, “बिल्ली मैडम, आप पेड़ों पर कैसे रह सकती हैं? आपके तो पंजे हैं, जो चढ़ने के लिए नहीं हैं।”
मोटू ने जल्दी से कहा, “अरे नहीं, मैंने तो सीख लिया है पेड़ों पर चढ़ना। मुझे बस थोड़ा अभ्यास करने की ज़रूरत है। क्या तुम मुझे सिखा सकती हो?”
चिड़िया मोटू की चालाकी समझ गई। वह हंसकर बोली, “बिल्ली मैडम, पेड़ों पर चढ़ना तो ठीक है, लेकिन उतरना भी सीखना होगा। नहीं तो आप वहीं फंसी रह जाओगी।”
यह सुनकर मोटू घबरा गई। वह समझ गई कि चिड़िया को पकड़ने का उसका प्लान असफल हो गया। वह चुपचाप वहाँ से चली गई।
नैतिक शिक्षा। चालाकी हमेशा काम नहीं आती। ईमानदारी का रास्ता ही सबसे अच्छा है।
