बचत का फल

अर्जुन और मीरा दोनों भाई-बहन थे। अर्जुन को हर रोज़ मिलने वाली जेबखर्च तुरंत खर्च कर देता था, लेकिन मीरा अपनी जेबखर्च बचाकर गुल्लक में डालती थी।

एक दिन, स्कूल में मेला लगा। अर्जुन को खिलौने बहुत पसंद आए, पर उसके पास पैसे नहीं थे। वह मीरा के पास गया और पैसे मांगने लगा। मीरा ने खुशी से अपनी गुल्लक खोली और उसमें से काफी सारे पैसे निकाले।

अर्जुन को बहुत ताज्जुब हुआ। उसने पूछा, “मीरा, इतने सारे पैसे कहाँ से आए?” मीरा ने बताया कि वह रोज़ थोड़ा-थोड़ा बचाती है, इसीलिए अब उसके पास इतने पैसे हैं।

अर्जुन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने मीरा से माफी मांगी और कहा कि वो भी अब पैसे बचाना सीखेगा। दोनों भाई-बहन ने मिलकर मेले में खिलौने खरीदे और खूब मज़े किए।

उस दिन से, अर्जुन भी अपनी जेबखर्च बचाने लगा। वह समझ गया कि थोड़ा-थोड़ा बचाने से भी भविष्य में ज़रूरत के लिए काफी पैसा इकट्ठा हो सकता है।

नैतिक शिक्षा। बचत करने की आदत डालनी चाहिए। थोड़ी-थोड़ी बचत भी बड़े काम आती है।

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