ईमानदार राही

विक्रम एक ईमानदार राही था। वह पैदल चलकर नए-नए शहरों की यात्रा करता था। एक दिन, रास्ते में उसे एक भारी थैली मिली। उसने थैली खोली तो उसमें सोने के सिक्के भरे हुए थे।

विक्रम को बहुत लालच आया, लेकिन वह जानता था कि यह पैसा किसी का ज़रूर होगा। वह आस-पास के गाँवों में गया और पूछताछ करने लगा। आखिरकार, उसे एक परेशान किसान मिला, जिसे बाज़ार से लौटते वक्त यह थैली खो गई थी।

किसान को अपनी थैली वापस मिलते हुए बहुत खुशी हुई। उसने विक्रम को इनाम देने की ज़िद की, लेकिन विक्रम ने मना कर दिया। वह बस इतना बोला, “ईमानदारी ही सबसे बड़ा इनाम है।”

उस रात, विक्रम शांत मन से सोया। उसे खुशी थी कि उसने ईमानदारी का रास्ता चुना। अगले दिन, वह अपनी यात्रा पर खुशी से निकल पड़ा।

नैतिक शिक्षा। ईमानदारी सबसे अच्छा गुण है। ईमानदार रहने से मन को शांति मिलती है।

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