पेड़ की छाया

एक गर्म दोपहर थी। राजन थक कर एक पेड़ के नीचे बैठ गया। पेड़ की छाया में उसे बहुत सुकून मिला। तभी एक बूढ़ी औरत आई और पानी माँगने लगी। राजन ने अपने पानी की बोतल उसे दे दी।

बूढ़ी औरत ने पानी पीकर धन्यवाद किया और बोली, “बेटा, तुमने बहुत अच्छा काम किया है। पेड़ की तरह तुमने भी किसी की थकान दूर की।” राजन को अच्छा लगा। उसे समझ आया कि पेड़ की तरह इंसान भी दूसरों के लिए सहारा बन सकता है।

नैतिक शिक्षा। हम सभी दूसरों के लिए सहारा बन सकते हैं। छोटी सी मदद से भी हम किसी की ज़िंदगी बदल सकते हैं।

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