
एक हरे-भरे जंगल में, जहाँ नदियाँ चाँदी की तरह चमकती थीं और पक्षी मधुर गीत गाते थे, एक नन्हा कछुआ रहता था, जिसका नाम था धीमा। धीमा धीरे-धीरे चलता था, लेकिन उसका दिल बहुत बड़ा था और वह हमेशा दूसरों की मदद करने को तैयार रहता था। उसी जंगल में एक चीता रहता था, जिसका नाम था तेजस। तेजस अपनी रफ्तार और ताकत पर बहुत घमंड करता था। वह अक्सर जंगल के जानवरों को चिढ़ाता और कहता, “मुझसे तेज कोई नहीं! तुम सब धीमे और कमजोर हो!”
एक दिन, जंगल में भयंकर सूखा पड़ गया। नदियाँ सूखने लगीं, और जानवरों को पानी की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ रहा था। तेजस, जो हमेशा अपनी तेजी पर इतराता था, जंगल के सबसे ऊँचे पहाड़ पर चढ़ गया, जहाँ एक गुप्त झरना बहता था। उसने सोचा, “मैं इस झरने का पानी अकेले पी लूँगा। बाकी जानवरों को क्यों दूँ?”
धीमा, जो अपने दोस्तों की चिंता में था, ने तेजस को झरने की ओर जाते देखा। वह समझ गया कि तेजस का घमंड और स्वार्थ जंगल के लिए मुसीबत बन सकता है। धीमा ने अपने दोस्तों—एक बुद्धिमान कौवे (काली) और एक मेहनती चींटी (श्रमिका)—को बुलाया और एक योजना बनाई।
धीमा ने कहा, “हमें तेजस को सबक सिखाना होगा कि घमंड और स्वार्थ से कभी सुख नहीं मिलता। काली, तुम झरने के पास उड़कर तेजस की हरकतों पर नजर रखो। श्रमिका, तुम अपनी चींटी सेना के साथ वहाँ पहुँचो और पानी को जंगल तक लाने का रास्ता बनाओ। मैं धीरे-धीरे वहाँ पहुँचूँगा और तेजस से बात करूँगा।”
काली ने हवा में उड़ान भरी और तेजस को झरने के पास देखा, जो पानी पी रहा था और बाकी जानवरों को दूर भगा रहा था। काली ने तेजस को चिढ़ाया, “अरे तेजस, तुम तो बहुत तेज हो, लेकिन क्या तुम एक छोटे से कौवे से भी तेज उड़ सकते हो?” तेजस गुस्से में काली के पीछे दौड़ा, लेकिन काली तेजी से उड़कर एक घने पेड़ में छिप गया।
इसी बीच, श्रमिका और उसकी चींटी सेना ने मिलकर झरने से पानी को छोटी-छोटी नालियों के जरिए जंगल की ओर मोड़ दिया। जब तेजस वापस लौटा, तो उसने देखा कि झरना अब सूख रहा था, क्योंकि पानी जंगल की ओर बह रहा था। वह गुस्से से चिल्लाया, “यह सब किसने किया?”
तभी धीमा धीरे-धीरे वहाँ पहुँचा और बोला, “तेजस, तुम तेज हो, लेकिन तुमने अपने घमंड में जंगल के जानवरों की परवाह नहीं की। हमने मिलकर पानी को सबके लिए बाँट लिया, क्योंकि एकता में ही ताकत है।”
तेजस को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने धीमा, काली और श्रमिका से माफी माँगी और वादा किया कि वह अब घमंड नहीं करेगा। उस दिन से, तेजस ने अपनी ताकत का इस्तेमाल जंगल की भलाई के लिए किया और सभी के साथ मिलकर रहने लगा।
नैतिक शिक्षा: घमंड और स्वार्थ अकेलेपन की ओर ले जाते हैं; एकता और नम्रता से ही सच्चा सुख मिलता है।
