तीन सवालों की कहानी

The Story of the Three Questions

एक दिन बादशाह अकबर अपने दरबार में बड़े गर्व से बैठे थे। उस दिन उनका मन बहुत प्रसन्न था। उन्होंने चारों तरफ नजर दौड़ाई और बीरबल को देखकर मुस्कुराए। फिर अचानक बोले, “बीरबल! आज हमें पूरा यकीन है कि दुनिया में हमसे ज्यादा बुद्धिमान कोई नहीं। अगर कोई हमसे ज्यादा अक्लमंद है, तो उसे साबित करना होगा!”

दरबार में सन्नाटा छा गया। सभी जानते थे कि बादशाह जब ऐसी बात कहते हैं तो बीरबल के लिए चुनौती शुरू हो जाती है। बीरबल ने विनम्रता से सिर झुकाया और बोले, “हुजूर, आपकी बुद्धि सूरज की तरह चमकती है, लेकिन अगर हुक्म हो तो मैं आपसे सिर्फ तीन सवाल पूछ लूं?”

अकबर ने हँसते हुए कहा, “पूछो बीरबल, पूछो! हम हर सवाल का जवाब देंगे।”

बीरबल ने शांत स्वर में पहला सवाल पूछा: “हुजूर, बताइए कि इस दुनिया में सबसे तेज़ चलने वाली चीज़ क्या है?”

अकबर ने सोचा और बोले, “घोड़ा! नहीं… हवा! नहीं… शायद बादल!”

बीरबल मुस्कुराए और बोले, “जी नहीं हुजूर। सबसे तेज़ तो मन है। मन एक पल में कश्मीर से कन्याकुमारी और वहाँ से स्वर्ग तक पहुँच जाता है।”

अकबर चुप हो गए। दरबार में हल्की हँसी की लहर दौड़ी।

फिर बीरबल ने दूसरा सवाल पूछा: “हुजूर, इस धरती पर सबसे गहरी चीज़ क्या है?”

अकबर ने तुरंत कहा, “समुद्र!”

बीरबल ने सिर हिलाया, “जी नहीं जहाँपनाह। सबसे गहरी चीज़ है मनुष्य का मन। कोई तलाश करे तो समुद्र की गहराई नापी जा सकती है, लेकिन मन की गहराई कोई नहीं नाप सका।”

अकबर की भौंहें सिकुड़ गईं। वे कुछ देर सोचते रहे, फिर बोले, “ठीक है, तीसरा सवाल पूछो।”

बीरबल ने बहुत नरमी से तीसरा सवाल पूछा: “हुजूर, बताइए कि इस सारी सृष्टि में सबसे कीमती चीज़ क्या है?”

अकबर ने गर्व से कहा, “सोना-चाँदी, हीरे-जवाहरात, हमारा तख्त-ओ-ताज!”

बीरबल ने हाथ जोड़कर कहा, “माफ़ कीजिएगा हुजूर, सबसे कीमती है – समय। एक खोया हुआ पल कभी लौटकर नहीं आता। सोना-चाँदी खो जाए तो फिर कमाया जा सकता है, लेकिन बीता हुआ समय किसी के पास नहीं लौटता।”

इस बार बादशाह अकबर पूरी तरह चुप हो गए। उनकी आँखें नीची हो गईं। दरबार में खामोशी छा गई। कई पल बाद अकबर ने धीरे से कहा, “बीरबल, तुमने आज हमें हमारी औकात याद दिला दी। हम सोचते थे कि हम सबसे बड़े हैं, लेकिन सच्चाई तो ये तीन सवाल बता गए।”

अकबर ने उठकर बीरबल के कंधे पर हाथ रखा और सारे दरबार के सामने कहा, “आज से हम यह कभी नहीं कहेंगे कि हमसे बड़ा कोई बुद्धिमान है। क्योंकि सच्ची बुद्धि घमंड को चुप करा देती है।”

बीरबल ने मुस्कुराते हुए सिर झुकाया और बोले, “हुजूर, आपकी यह सीख ही सबसे बड़ी जीत है।”

नैतिक शिक्षा: सच्ची बुद्धि घमंड को हराती है और सादे सवालों में भी बड़ा सबक छिपा होता है।

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