सोने की मुर्गी का रहस्य

The Mystery of the Golden Hen

एक दिन बादशाह अकबर के दरबार में एक अजीब सा आदमी आया। उसका नाम था हीरालाल। वह एक साधारण-सा व्यापारी लगता था, पर उसके हाथ में एक सोने की मुर्गी थी। जी हाँ, पूरी की पूरी सोने की बनी मुर्गी, जो चमक-चमक कर सबको अचंभित कर रही थी।

हीरालाल ने अकबर के सामने झुक कर कहा, “जहाँपनाह, यह मेरी सोने की मुर्गी है। यह हर रोज़ एक सोने का अंडा देती है। मैंने सुना है कि आप दुनिया के सबसे बड़े संग्रहकर्ता हैं, इसलिए मैं इसे आपको भेंट करना चाहता हूँ। बस एक शर्त है… इसे कोई छूने न पाए। अगर कोई छू लेगा तो यह अंडा देना बंद कर देगी।”

अकबर की आँखें चमक उठीं। सोने का अंडा हर रोज़? यह तो खजाना था! उन्होंने तुरंत मुर्गी को अपने निजी कक्ष में रखने का हुक्म दिया। अगली सुबह जब नौकरानी ने झाड़ू लगाई तो सचमुच एक सोने का अंडा ज़मीन पर पड़ा था। अकबर ने खुशी से बीरबल को बुलाया और कहा, “बीरबल! देखो, यह चमत्कार है! हमारा खजाना अब हर रोज़ बढ़ेगा।”

बीरबल ने मुर्गी को गौर से देखा। फिर मुस्कुराए और बोले, “हुजूर, यह तो बहुत बड़ी बात है। लेकिन मुझे एक रात इस मुर्गी के साथ रहने की इजाज़त दीजिए। मैं इसका रहस्य जानना चाहता हूँ।”

अकबर ने हँसते हुए कहा, “जान लो बीरबल, पर छूना मत!”

रात को बीरबल ने मुर्गी को अपने कमरे में रखा। कमरे में चारों तरफ़ दीये जलाए, ताकि अंधेरा न रहे। आधी रात को बीरबल ने देखा कि एक छोटा-सा छेद दीवार में था। उस छेद से एक पतला हाथ आया। उसने सोने की मुर्गी को उठाया और उसके नीचे से एक सोने का अंडा रखकर वापस चला गया।

बीरबल चुपचाप उस हाथ के पीछे गए। बाहर निकले तो देखा कि वह हीरालाल खुद था! वह हर रात सोने का अंडा रखकर लोगों को बेवकूफ बना रहा था। बीरबल ने उसे पकड़ लिया।

अगले दिन दरबार में बीरबल ने सारी कहानी सुनाई। हीरालाल ने काँपते हुए कबूला, “मैंने सोचा था कि लालच में बादशाह मुझे अमीर बना देंगे। मैं हर रात अंडा रखता था ताकि सब यकीन करें कि मुर्गी सोने की है।”

अकबर को पहले तो गुस्सा आया, पर फिर वे हँस पड़े और बोले, “बीरबल, तुमने फिर साबित कर दिया कि सच कितना भी छिप जाए, बुद्धि उसे ढूँढ ही लेती है।”

फिर अकबर ने हीरालाल से कहा, “तेरी चालाकी अच्छी थी, पर गलत जगह इस्तेमाल की। जा, अब से तू हमारे खजाने में असली सोने के गहने बनाया कर। तेरी कारीगरी काम आएगी।”

हीरालाल ने सिर झुकाया और खुशी-खुशी मान गया।

नैतिक शिक्षा: लालच में आँखें बंद कर लेने से ठगी आसान हो जाती है। सच्चाई को परखने की आदत ही सबसे बड़ा खजाना है।

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