
एक पुराने बरगद के पेड़ पर एक बूढ़ा गिद्ध रहता था, जिसका नाम था नेत्रहीन चाचा। उनकी आँखें अब कुछ भी नहीं देखती थीं, पर उनकी सुनने की शक्ति बहुत तेज थी और दिल बहुत नेक था। जंगल के सारे छोटे पक्षी उन्हें बहुत प्यार करते थे। वे नेत्रहीन चाचा को खाना लाकर देते और उनकी हर बात मानते थे। बदले में चाचा उन्हें अच्छी-अच्छी कहानियाँ सुनाते और सलाह देते थे।
एक दिन एक चालाक बिल्ली, जिसका नाम था मिठास, पेड़ के नीचे से गुजरी। उसने ऊपर देखा तो मुँह में पानी आ गया। पर पेड़ बहुत ऊँचा था और पक्षी बहुत सतर्क थे। मिठास ने सोचा, “सीधे हमला नहीं कर सकती, कोई तरकीब लगानी होगी।”
अगले दिन मिठास ने आँसू भरी आवाज में रोना शुरू किया। नेत्रहीन चाचा ने ऊपर से पूछा, “कोन है जो इतना रो रहा है?” मिठास बोली, “मैं अनाथ हूँ चाचा जी… मेरे मम्मी-पापा नहीं हैं… मुझे कोई प्यार नहीं करता… बस यहाँ शरण माँगने आई हूँ।”
नेत्रहीन चाचा का दिल पिघल गया। उन्होंने पक्षियों से कहा, “इसे ऊपर आने दो, हम सब मिलकर इसका खयाल रखेंगे।” पक्षियों को थोड़ा डर लगा, पर चाचा की बात टाल नहीं सके। मिठास को पेड़ पर जगह दे दी गई।
मिठास दिन में बहुत सेवा करती, चाचा की पीठ सहलाती, उनके लिए पानी लाती, मीठी-मीठी बातें करती। चाचा बहुत खुश थे। पर रात को जब सब सो जाते, मिठास चुपके से एक-दो पक्षियों को पकड़कर खा जाती और सुबह तक सब साफ कर देती। धीरे-धीरे पक्षियों की संख्या कम होने लगी। सब बहुत डरे हुए थे।
एक रात एक छोटी चिड़िया ने देख लिया कि मिठास क्या कर रही है। उसने चुपके से नेत्रहीन चाचा के कान में फुसफुसाया, “चाचा जी, बिल्ली ही रात को हमें खा रही है।”
चाचा ने सोने का नाटक किया। जब मिठास फिर आई तो चाचा ने अपनी तेज चोंच से उसकी पूँछ पकड़ ली और प्यार से, पर सख्ती से बोले, “मिठास बच्ची, तूने हमारा विश्वास तोड़ा। अब तुझे जाना होगा।”
मिठास रोने लगी, “मैं भूखी थी चाचा जी… मुझे माफ कर दो।” चाचा ने कहा, “भूख मिटाने के लिए झूठ और धोखा नहीं चलता। सच्चाई से माँगती तो हम सब तुझे खाना देते।”
सारे पक्षियों ने मिलकर मिठास को पेड़ से सुरक्षित नीचे उतार दिया। मिठास शर्मिंदा होकर चली गई। उस दिन के बाद वह जंगल में फल-फूल खाकर रहने लगी और कभी किसी को धोखा नहीं दिया।
नेत्रहीन चाचा ने सबको गले लगाया और बोले, “देखा, आँखें न देखें तो भी सच्चाई सुनाई देती है।”
नैतिक शिक्षा: दया करना अच्छा है, पर बिना जाँचे किसी पर पूरा भरोसा मत करो। सच्चाई और विश्वास ही सच्ची दोस्ती की नींव हैं।
