अम्मा, हर शाम चाय बनातीं। बेटा, राहुल, अक्सर नखरे दिखाता, “चाय ठंडी है, शक्कर कम है!” पर अम्मा हंसकर उसे पिलातीं। एक दिन, अम्मा बीमार पड़ीं। राहुल को चाय बनानी पड़ी। पानी गरम करना, पत्ती डालना, दूध उबालना – वो सब मुश्किल लगा। तब समझ आया, अम्मा का प्यार ही चाय में घुला था। अगले दिन, अम्मा ठीक थीं। राहुल ने खुद चाय बनाकर दी, “आज थोड़ी जल्दी बना ली, माफ करना।” अम्मा ने प्यार से घूँट ली, “बहुत मीठी है!”
नैतिक शिक्षा। हम अक्सर छोटी-छोटी चीजों को हल्के में लेते हैं। दूसरों के प्यार को समझना जरूरी है। उनके त्याग की कद्र करनी चाहिए।
