सपनों की उड़ान

एक छोटे से गाँव में रहने वाली एक लड़की, नेहा, बहुत ही मेहनती और सपनों से भरी हुई थी। उसका सपना था कि वह एक दिन पायलट बने और आसमान में उड़ान भरे। लेकिन उसके गाँव के लोगों का मानना था कि लड़कियों के लिए यह सपना देखना बेकार है। उनका कहना था, “लड़कियों का काम घर संभालना होता है, आसमान में उड़ना नहीं।”

नेहा के पिता, रमेश, एक किसान थे। वे नेहा के सपनों को समझते थे, लेकिन उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वे उसे पायलट बनने की ट्रेनिंग दिला सकें। नेहा की माँ, सीमा, भी उसके सपनों का समर्थन करती थी, लेकिन वह भी समाज के डर से चुप रहती थी।

एक दिन, गाँव में एक नई शिक्षिका, मिस शर्मा, आई। वह बहुत ही प्रगतिशील सोच वाली थी और बच्चों के सपनों को पूरा करने में विश्वास रखती थी। नेहा ने मिस शर्मा को अपने सपने के बारे में बताया। मिस शर्मा ने नेहा की हिम्मत बढ़ाई और उसे बताया कि अगर वह मेहनत करे, तो उसका सपना जरूर पूरा हो सकता है।

मिस शर्मा ने नेहा को एक प्रतियोगिता के बारे में बताया, जिसमें जीतने वाले छात्र को पायलट बनने की ट्रेनिंग के लिए छात्रवृत्ति मिलती थी। नेहा ने उस प्रतियोगिता में भाग लेने का फैसला किया। उसने दिन-रात मेहनत की और अपने सपने को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया।

प्रतियोगिता के दिन, नेहा ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उसने न केवल प्रतियोगिता जीती, बल्कि सभी का दिल भी जीत लिया। उसे छात्रवृत्ति मिली और वह पायलट बनने की ट्रेनिंग के लिए चली गई।

कुछ सालों बाद, नेहा एक सफल पायलट बन गई। वह अपने गाँव वापस आई और सभी को दिखाया कि अगर आप अपने सपनों पर विश्वास रखें और मेहनत करें, तो कुछ भी असंभव नहीं है।

नैतिक शिक्षा। सपने देखना और उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करना कभी भी गलत नहीं होता। चाहे समाज कुछ भी कहे, अगर आप अपने सपनों पर विश्वास रखें और उन्हें पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्प रखें, तो आप जरूर सफल होंगे।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

© 2026 Hindi Kisse Kahaniyan