आर्या को पढ़ना बहुत पसंद था। एक दिन, दादी के सामान में उसे एक पुरानी किताब मिली। किताब खोलकर उसने देखा कि उसमें रंगीन पक्षियों की खूबसूरत तस्वीरें थीं। हर तस्वीर के नीचे पक्षी का नाम और थोड़ी जानकारी भी लिखी थी।
आर्या को किताब बहुत पसंद आई। उसने दादी से पूछा, “दादी, ये किताब आपकी है?” दादी मुस्कुराईं और बोलीं, “हाँ, बेटा। जब मैं छोटी थी, तो मुझे भी किताब देखना बहुत अच्छा लगता था।”
अगले कुछ दिनों तक, आर्या और दादी बैठकर वही किताब देखते। दादी आर्या को तस्वीरों में बतातीं कि किस पक्षी की आवाज़ कैसी होती है और वे कहाँ रहते हैं। आर्या को दादी की बातें बहुत मज़ेदार लगतीं।
कुछ दिनों बाद, आर्या ने बालकनी में एक रंगीन पक्षी देखा। उसने दादी की किताब में देखा और पता लगाया कि वह पंछी कोयल है। आर्या दादी के पास दौडा और खुशी से बोला, “दादी, मैंने कोयल को देखा!”
नैतिक शिक्षा। किताबें ज्ञान का भंडार होती हैं। उनसे हम नई चीज़ें सीख सकते हैं। साथ मिलकर पढ़ने से सीखना और भी मज़ेदार हो जाता है।
