मोहिनी गाँव में रहती थी। पहले गाँव में बहुत सारे पेड़ हुआ करते थे। लेकिन, कुछ समय से लोग पेड़ काट रहे थे। मोहिनी को यह बिलकुल अच्छा नहीं लगता था। वह जानती थी कि पेड़ काटने से वातावरण खराब होगा।
एक दिन, मोहिनी ने फैसला किया कि वह कुछ करेगी। उसने गाँव के बच्चों को इकट्ठा किया और पेड़ बचाने के बारे में बताया। बच्चों को भी पेड़ काटना अच्छा नहीं लगा। उन्होंने मिलकर पेड़ों पर “बचाओ, बचाओ” के नारे लिखे।
फिर, मोहिनी और बच्चों ने एक नाटक तैयार किया। नाटक में उन्होंने दिखाया कि पेड़ कैसे हमारी ज़िंदगी का हिस्सा हैं। गाँववालों ने नाटक देखा और सोचने लगे। उन्हें एहसास हुआ कि मोहिनी और बच्चे सही कह रहे हैं।
इसके बाद, गाँव में पेड़ काटना कम हो गया। मोहिनी और बच्चों को बहुत खुशी हुई। उन्होंने मिलकर गाँव को हरा-भरा बनाए रखने का फैसला किया।
नैतिक शिक्षा। प्रकृति की रक्षा करना हमारा सबका फर्ज़ है। हमें पेड़ों को बचाना चाहिए ताकि हमारा वातावरण शुद्ध रहे।
