पहाड़ों का राज

वीर, इतिहास का छात्र था। उसे प्राचीन सभ्यताओं और खोये हुए राज्यों के बारे में जानने का बड़ा शौक था। वह एक ऐसे पहाड़ी इलाके में रहता था, जिसके बारे में किंवदंतियां थीं कि वहां कभी एक शक्तिशाली साम्राज्य हुआ करता था।

वीर को इस साम्राज्य के बारे में कोई सबूत नहीं मिल रहा था। प्रोफेसर त्रिपाठी, उसका गुरु, मानता था कि ये सिर्फ किंवदंतियां ही हैं। हताश होकर वीर अपनी दादी के पास गया।

वीर की दादी पहाड़ों में पैदा हुईं और पलीं थीं। प्रकृति से उनका गहरा नाता था। वीर ने उन्हें किंवदंतियां सुनाईं और बताया कि प्रोफेसर को इन पर यकीन नहीं है।

दादी ने वीर को ध्यान से सुना। फिर मुस्कुराकर बोलीं, “वीर, पहाड़ कभी झूठ नहीं बोलते। उनकी चट्टानों में कहानियां छुपी होती हैं। बस उन्हें सुनना सीखना चाहिए।” उन्होंने वीर को कुछ ऐसे पहाड़ी रास्तों के बारे में बताया, जिनके बारे में किसी को नहीं पता था।

दादी की बताई राहों पर चलकर वीर दुर्गम पहाड़ी इलाकों में पहुंचा। वहां उसे गुफाएं मिलीं, जिनमें प्राचीन चित्रकारी और शिलालेख थे। उसने टूटे-फूटे मंदिर और भग्नावशेष देखे। धीरे-धीरे इकट्ठा किए गए सबूतों से एक कहानी बनने लगी।

वीर खुशी-खुशी प्रोफेसर त्रिपाठी के पास गया। उसने प्रोफेसर को सबूत दिखाए। प्रोफेसर दंग रह गए। उन्होंने माना कि वीर ने एक खोए हुए साम्राज्य को खोज निकाला है।

वीर की खोज राष्ट्रीय समाचारों में छा गई। इतिहासकारों और पुरातत्वविदों का दल उस पहाड़ी इलाके में पहुंचा। खुदाई हुई और प्राचीन साम्राज्य के अवशेष पूरी तरह से सामने आए।

वीर को सम्मानित किया गया। लेकिन उसे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की थी कि उसने दादी की बात मानी थी। उसे समझ आया कि इतिहास सिर्फ किताबों में नहीं, प्रकृति की गोद में भी छुपा होता है।

कहानी के अंत में वीर दादी के साथ पहाड़ों में खड़ा है। वह दादी को बता रहा है कि कैसे उसकी खोज से इतिहास को फिर से लिखा जा रहा है। दूर से खुदाई का काम चलता दिख रहा है। वीर दादी से कहता है, “दादी, आप सही थीं। पहाड़ों ने अपना राज खोल दिया।” दादी मुस्कुराकर कहती हैं, “बेटा, प्रकृति हमेशा सुनती है, बस सुनने वाले की ज़रूरत होती है।”

नैतिक शिक्षा। कहानी का सार यह है कि सफलता के रास्ते हमेशा सीधे और किताबों में नहीं होते। कभी-कभी परंपराओं और किंवदंतियों में भी छिपे इतिहास का राज होता है, जिन्हें खुले दिमाग से समझने की ज़रूरत है। वीर ने अपनी दादी की बात मानकर, पहाड़ों की गोद में छिपे राज को खोज निकाला। इस कहानी से सीख मिलती है कि प्रकृति को गौर से देखने और उससे सीखने में ही इतिहास और ज्ञान छिपे होते हैं।

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