अनुष्का एक होनहार छात्रा थी। वह बड़ी होकर वैज्ञानिक बनना चाहती थी। एक दिन, स्कूल में प्रोजेक्ट के लिए पौधों पर रिसर्च करने का समय आया। अनुष्का ने चाँद पर पौधे उगाने के बारे में प्रोजेक्ट बनाना चाहा।
उसकी टीचर, श्रीमती शर्मा, मुस्कुराईं और बोलीं, “अनुष्का, यह बहुत अच्छा आइडिया है। लेकिन सबसे पहले ये सीखो कि धरती पर पौधे कैसे उगते हैं। फिर चाँद पर उगाने की सोचना।”
अनुष्का को थोड़ी निराशा हुई, पर उसने हार नहीं मानी। उसने श्रीमती शर्मा की बात मानी और घर के गमलों में बीज बोए। उसने रोज़ पौधों को पानी दिया और उनकी देखभाल की।
कुछ दिनों बाद, छोटे-छोटे पौधे उग आए। अनुष्का बहुत खुश हुई। उसने सीखा कि पौधों को उगाना कोई आसान काम नहीं है। उन्हें धूप, पानी, और देखभाल की ज़रूरत होती है।
प्रोजेक्ट के दिन, अनुष्का ने धरती पर पौधे उगाने के बारे में विस्तार से बताया। उसने ये भी बताया कि भविष्य में चाँद पर कृत्रिम वातावरण बनाकर वहाँ पौधे उगाना संभव हो सकता है।
श्रीमती शर्मा अनुष्का की मेहनत और बड़ी सोच से बहुत प्रभावित हुईं। उन्होंने कहा, “अनुष्का, छोटी-छोटी सीख बाद में बड़े काम आती हैं।”
नैतिक शिक्षा। बड़े सपने देखना अच्छा है, लेकिन सबसे पहले बुनियादी बातें सीखना ज़रूरी है।
