गली की बिल्ली और खोया खिलौना

नन्ही गुड़िया गुम हो गई थी। रोते हुए रिया उसे ढूंढ रही थी, जब गलियारे से गुज़रती बिल्ली, मुनमुन, ने उसकी गुड़िया देखी। वह एक छोटे बच्चे के हाथ में थी, जो ज़ोर-ज़ोर से हंस रहा था। मुनमुन समझ गई कि यह खिलौना गलती से उस बच्चे के पास आ गया है।

सोचकर, मुनमुन उस बच्चे के पैरों के पास रगड़ने लगी, उम्मीद जगाई कि वह छोड़ेगा। बच्चा डरकर थोड़ा पीछे हटा, लेकिन खिलौना नहीं छोड़ा। मुनमुन ने हिम्मत नहीं हारी। उसने मीआंव-मींव की आवाज़ें निकालकर बच्चे का ध्यान खींचा और फिर आगे बढ़कर गुड़िया के पास खड़ी हो गई।

बच्चा हैरान हुआ। उसने धीरे से गुड़िया छोड़ी और भाग गया। मुनमुन खुशी से गुड़िया उठाकर रिया के पास ले गई और हल्के से थिरथिराई। रिया गुड़िया देखकर चौंक गई और फिर मुनमुन को गले लगाते हुए बोली, “धन्यवाद, मुनमुन!”

नैतिक शिक्षा। दयालुता किसी भाषा या प्रजाति की मोहताज नहीं होती। मदद का हाथ तब भी बढ़ाया जा सकता है, जब शब्द न हों।

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