टोकरी वाला और बूढ़ा

रमेश, बाज़ार में टोकरियां बेच रहा था। एक बूढ़ा आदमी आया और टोकरियों को ध्यान से देखने लगा। उसने रमेश से पूछा, “ये टोकरियां कितनी मजबूत हैं?” रमेश ने मुस्कुराते हुए कहा, “बहुत मजबूत हैं, दादा। सालों तक चलेंगी।”

बूढ़े ने एक टोकरी उठाई और पूछा, “मैं इसे नदी किनारे ले जाऊंगा, क्या टिकेगी?” रमेश ने दुकानदारों जैसा जवाब देने लगा, “नदी किनारे? नहीं, दादा। वहां नमी से खराब हो जाएगी।”

बूढ़े ने निराश होकर कहा, “तब मेरे लिए ये काम की नहीं।” और चला गया।

कुछ देर बाद, रमेश को बुरा लगा। उसने सोचा, “मैंने बूढ़े की बात क्यों नहीं सुनी? शायद उसे सचमुच नदी किनारे ही ले जानी थी।” वह बूढ़े को ढूंढने निकला और उसे नदी किनारे, टोकरी में मछलियां रखते हुए पाया।

रमेश शर्मिंदा हो गया और माफी मांगी। बूढ़े ने मुस्कुराकर कहा, “कोई बात नहीं, बेटा। हर चीज का अपना इस्तेमाल होता है। जरूरी है कि हम उसे समझें।”

नैतिक शिक्षा। पहले दूसरों की जरूरतों को समझें, फिर ही सलाह दें। जल्दबाजी में राय देने से नुकसान हो सकता है।

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