चिड़िया और बन्दर

पेड़ पर एक चिड़िया अपने घोंसले में रहती थी। एक दिन, एक शरारती बन्दर पेड़ पर झूलते हुए आया और चिड़िया के घोंसले को हिलाने लगा। चिड़िया घबरा गई और बन्दर से रुकने की निवेदन करने लगी।

बन्दर ने चिढ़िया की बात न मानी और हंसने लगा। गुस्से में चिड़िया ने कहा, “तुम्हें मेरा घोंसला अच्छा लगता है तो खुद का बनाओ। जंगल इतना बड़ा है, पेड़ बहुत सारे हैं।”

बन्दर को एहसास हुआ कि उसकी शरारत गलत थी। वह शर्मिंदा होकर पेड़ से उतर गया। थोड़ी दूर जाकर बन्दर को अकेलापन महसूस हुआ। उसे एहसास हुआ कि चिड़िया की बात सही थी।

अगले दिन, बन्दर पेड़ों के बीच टहलता रहा, लेकिन उसे अपना घोंसला बनाने के लिए सही जगह नहीं मिली। अंत में, वह उसी पेड़ पर लौट आया और माफी मांगते हुए चिड़िया से मदद करने का अनुरोध किया। चिड़िया ने बन्दर को माफ कर दिया और उसे घोंसला बनाने में मदद करने के लिए सहमत हो गई।

नैतिक शिक्षा। दूसरों को परेशान करने से कोई फायदा नहीं होता। पछताने से अच्छा है कि पहले ही सोच-समझकर व्यवहार करें।

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