रवि एक नन्हा लड़का था जिसे चित्र बनाना बहुत पसंद था। वह हर चीज को रंगीन बना देता था – किताबें, दीवारें, कभी-कभी तो अपनी टी-शर्ट तक।
एक दिन, रवि ने अपनी कलाकृतियां स्कूल ले गया। उसे लगा कि सबको उसका काम पसंद आएगा। लेकिन, कुछ बच्चे हंसने लगे। रवि को बुरा लगा और उसने उदास होकर अपने चित्र छिपा लिए।
घर आकर, रवि अपनी दादी के पास गया। दादी ने रवि का रूख देखकर पूछा क्या हुआ। रवि ने सारी बात बताई। दादी ने रवि के चित्रों को देखा और प्यार से कहा, “रवि, तुम्हारी कला बहुत खास है। हर कलाकार की अपनी शैली होती है।”
दादी की बात सुनकर रवि खुश हुआ। अगले दिन, रवि ने फिर से चित्र बनाना शुरू किया। इस बार उसने मनचाहे रंगों का इस्तेमाल किया और अपनी कल्पना को उड़ने दिया। कुछ दिनों बाद, स्कूल में कला प्रदर्शनी हुई। रवि ने भी अपने चित्र वहाँ लगाए। इस बार सब बच्चे रवि की कला की तारीफ कर रहे थे।
नैतिक शिक्षा। कभी-कभी दूसरों की राय हमें निराश कर सकती है। लेकिन, हमें अपनी कला और खुद पर भरोसा रखना चाहिए।
