अर्जुन एक साहसी युवक था। उसे पुराने किले, खंडहरों और रहस्यों की खोज में घूमना बहुत पसंद था। एक बार, वह एक पुराने जंगल में घूम रहा था, जहां एक प्राचीन मंदिर के खंडहर थे। मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक पुराना पत्थर लगा हुआ था, जिस पर कुछ अजीबोगरीब चिन्ह उकेरे हुए थे।
अर्जुन ने उन चिन्हों को ध्यान से देखा। उसे लगा कि ये कोई गुप्त संदेश हो सकता है। वह चिन्हों को अपनी डायरी में उतारने लगा। जब वह चिन्हों को देख रहा था, तो अचानक एक साँप वहाँ से निकला। अर्जुन डरकर पीछे हट गया।
वह कुछ दिनों तक उस मंदिर के बारे में सोचता रहा। वह पुस्तकालय गया और उन चिन्हों के बारे में जानकारी जुटाने लगा। उसे पता चला कि ये चिन्ह प्राचीन काल की एक गुप्त भाषा हो सकती है।
अर्जुन ने पुस्तकालय में कई दिन बिताए। उसने प्राचीन भाषाओं की किताबें पढ़ीं और उन चिन्हों का अर्थ समझने की कोशिश की। धीरे-धीरे, उसे उन चिन्हों का अर्थ समझ आने लगा। उन चिन्हों में एक गुप्त संदेश छिपा हुआ था, जो एक खजाने की ओर इशारा करता था।
संदेश के अनुसार, खजाना मंदिर के नीचे एक गुफा में छिपा हुआ था। अर्जुन उत्साहित हो गया। उसने अपने दोस्त, विवेक को इस बारे में बताया। विवेक भी एक साहसी युवक था और वह इस साहसिक कार्य में अर्जुन का साथ देने के लिए तैयार हो गया।
उस रात, अर्जुन और विवेक मंदिर के पास पहुंचे। उन्होंने मंदिर के आस-पास खोदा और उन्हें जमीन के नीचे एक गुफा का रास्ता मिला। सावधानी से, वे गुफा में उतरे। गुफा अंधेरी थी, इसलिए उन्होंने अपने टॉर्च जलाए।
गुफा में बहुत सारे मोड़ थे। उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्हें सांपों, चमगादड़ों और अंधेरे से डरना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
अंत में, उन्हें एक बड़ा हॉल दिखाई दिया। हॉल के बीच में एक बड़ा सा खजाना रखा हुआ था। खजाने में सोने के सिक्के, कीमती रत्न और प्राचीन मूर्तियां थीं।
अर्जुन और विवेक बहुत खुश हुए, लेकिन उन्होंने लालच में नहीं आने दिया। उन्होंने खजाने को वहीं छोड़ दिया और उसे स्थानीय अधिकारियों को सौंप दिया।
इस घटना के बाद, अर्जुन और विवेक बहुत प्रसिद्ध हुए। लोगों ने उनकी ईमानदारी की बहुत प्रशंसा की। अर्जुन और विवेक ने सीखा कि लालच से कभी भी खुशी नहीं मिलती है। असली खुशी तो अच्छे काम करने और ईमानदारी से जीने में है।
नैतिक शिक्षा। लालच बुरी बला है। ईमानदारी और साहस से ही सच्ची सफलता मिलती है।
