दूधवाला और मोर

गली में रोज़ सुबह दूध बांटने वाले रमेश को मोर से बड़ी तकलीफ थी। वो हर सुबह उसके बगीचे में घुसकर फूल बिखेर देता था, जिससे गुस्साए रमेश उसे भगाता। एक दिन, एक बुज़ुर्ग ने इसे देखा और रमेश से कहा, “क्यों भगाते हो? मोर तो सुंदरता बिखेर रहा है।”

रमेश बोला, “सुंदरता से क्या फायदा? वो फूल बिखेर देता है, मेरा नुकसान होता है।” बुज़ुर्ग ने मुस्कुराकर कहा, “तुम सिर्फ नुकसान देख रहे हो। वो रंग-बिरंगा मोर तुम्हारी गली की पहचान बन गया है। लोग सुबह तुम्हारे दूध लेने के लिए भी उस मोर को देखने आते हैं।”

रमेश ने सोचा और अगले दिन मोर को नहीं भगाया। थोड़े ही दिनों में, गली में दूध खरीदने वालों की संख्या बढ़ गई। रमेश समझ गया कि सुंदरता सिर्फ देखने के लिए नहीं होती, वो आकर्षण भी लाती है।

नैतिक शिक्षा। हर किसी में अच्छाई ढूंढें। कभी-कभी वही चीज़ जो परेशानी लगती है, वो फायदे का रास्ता भी खोल सकती है।

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