भीड़-भाड़ वाली सड़क पर रिक्शा चलाने वाले लखन की नज़र अचानक एक युवा कलाकार पर पड़ी, जो सस्ते रंगों से दीवारों को रंग रहा था। हंसते हुए लखन बोला, “कितनी मेहनत, रंग भी सस्ते, मगर कभी नहीं टिकेंगे।”
कलाकार मुस्कुराया, “मेरे सपने तो रंगीन हैं, साहब। सस्ते रंग जल्दी उतर जाएं तो क्या, नए सपने रंगने होंगे तो नई दीवारें मिलेंगी!”
लखन सोच में पड़ गया। अक्सर वो भी जिंदगी की कठिनाइयों की वजह से हार मान लेता था। कलाकार के हौसले ने उसे झकझोरा। उस दिन से लखन ने भी कम मेहनत नहीं की, पर अब मुस्कुराते हुए की। वो समझ गया कि हार मानना आसान है, मगर रंगीन सपने तभी पूरे होंगे, जब कोशिशें रंगीन हों।
नैतिक शिक्षा। हर परिस्थिति में हार न मानें। छोटी-छोटी कोशिशों से भी सपने पूरे हो सकते हैं।
