एक छोटी चिड़िया, ऊँचे वृक्ष पर अपना घोंसला बना रही थी। उसने टहनियों और घास से मजबूत घोंसला बनाया। मगर अचानक हवा का जोरदार झोंका आया और घोंसला जमीन पर गिर गया। चिड़िया निराश हो गई। अन्य चिड़ियों ने उसे हंसते हुए कहा, “अभी सीखा होगा घोंसला बनाना।”
लेकिन चिड़िया हार नहीं मानी। उसने दोबारा मेहनत से घोंसला बनाना शुरू किया, इस बार और मजबूती से। उसने इसमें सूखी पत्तियां भी लगाईं। फिर से हवा का जोरदार झोंका आया, मगर इस बार घोंसला टस से मस नहीं हुआ। अन्य चिड़ियों को हैरानी हुई।
कुछ ही दिनों में चिड़िया के घोंसले में तीन प्यारे बच्चे हुए। एक दिन फिर तूफान आया। मगर चिड़िया का घोंसला मजबूत था, बच्चों को कोई नुकसान नहीं हुआ।
नैतिक शिक्षा। मेहनत और समझदारी से किए गए काम का फल हमेशा मीठा होता है। हार मानने से कुछ नहीं मिलता, कोशिश करते रहना ज़रूरी है।
