
एक गाँव में पंडित जी नाम का एक बहुत नेक और सीधा-सादा ब्राह्मण रहता था। उसकी एक बहुत प्यारी सफेद बकरी थी जिसका नाम था मोटी। मोटी रोज सुबह-शाम “मैं… मैं…” की आवाज में पंडित जी का स्वागत करती थी।
एक रात एक चालाक चोर, जिसका नाम था लालची लल्लू, पंडित जी के घर में घुसा। उसने मोटी को उठाया और कंधे पर डालकर भागने लगा। रास्ते में मोटी जोर-जोर से चिल्लाने लगी, “मैं… मैं… बचाओ! चोर ले जा रहा है!”
लालची लल्लू डर गया कि कोई सुन लेगा। उसने चाल सोची और मोटी से मीठी आवाज में बोला, “अरे मोटी रानी, चुप हो जाओ। मैं तुम्हें तुम्हारे मम्मी-पापा के पास ले जा रहा हूँ। पंडित जी ने ही मुझे भेजा है।”
मोटी थोड़ा चुप हुई, पर फिर बोली, “पर पंडित जी तो सो रहे हैं!” लल्लू ने कहा, “नहीं-नहीं, उन्होंने मुझे कहा था कि तुम्हें नए घर में ले जाऊँ जहाँ ढेर सारा हरा-भरा चारा है।”
अब रास्ते में तीन कुत्ते मिले। वे भौंकने लगे। लल्लू ने उनसे कहा, “अरे भाइयों, यह मेरी अपनी बकरी है। मैं इसे घर ले जा रहा हूँ।” कुत्तों ने मोटी से पूछा, “सच है मोटी?” मोटी लल्लू की बातों में आ गई थी, उसने कहा, “हाँ-हाँ, ये मेरे मालिक हैं।”
फिर एक गाय मिली। गाय ने पूछा, “मोटी, तू इतनी रात को कहाँ जा रही है?” लल्लू ने जल्दी से कहा, “यह मेरी बहन है, इसे इसके ससुराल छोड़ने जा रहा हूँ।” मोटी चुप रही।
आखिर में लल्लू अपने घर पहुँचा और मोटी को बाँधकर सोने चला गया। सुबह जब वह मोटी को देखने आया तो मोटी गायब थी! केवल उसकी रस्सी कटी हुई पड़ी थी।
दरअसल रात में मोटी को अपनी गलती समझ आ गई थी। उसने अपने मजबूत दाँतों से रस्सी काटी और चुपके से पंडित जी के घर वापस भाग आई। सुबह पंडित जी ने मोटी को गले लगाया और खुश होकर कहा, “मेरी प्यारी मोटी वापस आ गई!”
उधर लालची लल्लू रोता रहा, “मैंने इतना झूठ बोला, फिर भी बकरी भाग गई!”
उस दिन के बाद मोटी ने कभी किसी अजनबी की बात पर पूरा यकीन नहीं किया और लल्लू ने चोरी छोड़ दी।
नैतिक शिक्षा: किसी की मीठी-मीठी बातों में आकर सच को मत भूलो। हमेशा अपने दिल की आवाज सुनो और सच्चाई पर भरोसा रखो।
