सुबह की चाय पीते हुए, अंजलि ने गलती से अपनी दादी की चूड़ी तोड़ दी। वह बहुत परेशान हो गई, क्योंकि चूड़ी दादी को दादाजी की याद दिलाती थी। अंजलि ने माफी मांगी और कहा, “चलो, नई चूड़ी ले लें।”
दादी ने मुस्कुराकर कहा, “नहीं, बेटा। टूटी हुई चीजों में भी अपना ही एक सौंदर्य होता है। ठीक हो जाए तो पहन लूंगी, नहीं तो संभालकर रखूंगी।” कुछ दिनों बाद, एक कारीगर से अंजलि ने टूटी चूड़ी को ठीक करवा दिया। दादी बहुत खुश हुईं और अंजलि को गले लगा लिया।
नैतिक शिक्षा। पुरानी चीजों का सम्मान करना चाहिए, क्योंकि उनसे जुड़ी होती हैं प्यारी यादें। टूटी चीजों को फेंकने की जल्दी नहीं करनी चाहिए, उन्हें ठीक करने का प्रयास करना चाहिए।
