
महल के खजाने से कई दिनों से छोटी-मोटी चीज़ें गायब हो रही थीं। कभी एक सोने की छोटी डिबिया, कभी एक चमकदार हार। पहरेदार रात-रात भर पहरा देते, पर चोर कभी नहीं पकड़ा जाता था।
बादशाह अकबर बहुत परेशान हो गए। उन्होंने बीरबल को बुलाया और कहा, “बीरबल, यह चोर बहुत चालाक है। कोई तरकीब सोचो।”
बीरबल ने शांति से जवाब दिया, “हुजूर, चोर को पकड़ने के लिए कभी-कभी सबसे अनोखी तरकीब सबसे कारगर होती है। मुझे एक रात दीजिए।”
अगली रात बीरबल ने एक नई योजना बनाई। उन्होंने खजाने के कमरे के बीचों-बीच बाकी बची हुई कीमती चीज़ें रख दीं। फिर महल के सभी नौकरों, पहरेदारों और संदिग्ध लोगों को उसी कमरे में बुलाया। सबको एक बड़े घेरे में खड़ा किया और कहा, “आज रात सब एक-दूसरे का हाथ पकड़कर खड़े रहोगे। आँखें बंद रखोगे। मैं दीया बुझा रहा हूँ। अगर कोई हाथ छोड़कर खजाने की तरफ़ बढ़ेगा, तो वह चोर होगा।”
कमरा पूरी तरह अंधेरा हो गया। सब लोग एक-दूसरे का हाथ पकड़े खड़े थे। बहुत देर तक सन्नाटा रहा। अचानक एक हल्की सी हलचल हुई। किसी ने हाथ छोड़ दिया।
बीरबल ने तुरंत दीया जलाया। रोशनी होते ही देखा कि एक नौकर का दाहिना हाथ खाली था और वह चुपके से खजाने की तरफ़ बढ़ रहा था। उसी के हाथ में छोटी सी सोने की डिबिया भी थी।
चोर पकड़ा गया! वह हैरान रह गया कि इतनी साधारण सी तरकीब ने उसे फँसा दिया।
अकबर ज़ोर से हँसे और बोले, “बीरबल, यह तरकीब सच में अनोखी थी! अंधेरे में हाथ पकड़ना… कमाल हो गया।”
बीरबल मुस्कुराए और बोले, “हुजूर, चोर अकेले काम करता है। जब सब एक-दूसरे से जुड़े हों, तो अकेला आदमी अपने-आप सामने आ जाता है।”
उस दिन के बाद महल में फिर कभी चोरी नहीं हुई।
नैतिक शिक्षा: जब सब लोग एक साथ होते हैं और एक-दूसरे का साथ निभाते हैं, तो गलत करने वाला अपने आप पकड़ा जाता है।
