
एक दिन बादशाह अकबर दरबार में सोच में डूबे बैठे थे। अचानक उन्होंने बीरबल से पूछा, “बीरबल, बताओ तो सही — इस दुनिया में सबसे ईमानदार आदमी कौन होगा?”
बीरबल मुस्कुराए और बोले, “हुजूर, ईमानदारी दिखाने वाले बहुत मिल जाते हैं, लेकिन सच में ईमानदार आदमी ढूँढ़ना थोड़ा मुश्किल है। अगर आप इजाज़त दें तो मैं एक छोटा सा तरीका आज़माऊँ?”
अकबर ने सहमति दे दी।
बीरबल ने एक साधारण-सी लकड़ी की पेटी ली। उसमें उन्होंने सिर्फ़ एक छोटा सा कागज़ रखा और पेटी को बंद कर दिया। फिर उस पेटी को शहर के सबसे व्यस्त बाज़ार में एक पत्थर पर रखवा दिया। पेटी पर बड़े अक्षरों में लिखा था: “इस पेटी में बहुत कीमती चीज़ है। सिर्फ़ दुनिया का सबसे ईमानदार आदमी ही इसे खोले।”
बाज़ार में हलचल मच गई। लोग इकट्ठे हो गए। कोई कहता, “चलो तोड़कर देखते हैं।” कोई कहता, “छूना भी नहीं चाहिए।” कुछ लालची लोग पेटी को उठाने की कोशिश करने लगे, लेकिन पहरेदारों ने उन्हें रोक दिया।
शाम तक ज्यादातर लोग चले गए। तब एक गरीब लकड़हारा बाज़ार से गुज़रा। उसने पेटी देखी। उसने सोचा, “यह किसी की खोई हुई चीज़ होगी।” वह वहीं बैठ गया। उसने कई घंटे इंतज़ार किया कि कोई मालिक आए। जब कोई नहीं आया, तो उसने पेटी उठाई और सीधे बादशाह के दरबार में ले आया।
दरबार में उसने कहा, “जहाँपनाह, यह पेटी बाज़ार में पड़ी थी। मैंने इसे नहीं खोला क्योंकि यह मेरी नहीं है। आप इसे सही मालिक तक पहुँचा दीजिए।”
बीरबल ने मुस्कुराते हुए पेटी खोली। अंदर सिर्फ़ एक कागज़ था जिस पर लिखा था: “जो आदमी इस पेटी को बिना खोले यहाँ तक लाया है, वही दुनिया का सबसे ईमानदार आदमी है।”
अकबर और पूरे दरबार ने ताली बजाई। अकबर ने लकड़हारे को इनाम दिया और बोले, “बेटा, तुम्हारी ईमानदारी सोने से भी भारी है।”
लकड़हारा शरमाते हुए मुस्कुराया और अपने घर लौट गया।
नैतिक शिक्षा: असली ईमानदारी वह है जो तब भी निभाई जाए जब कोई हमें देख न रहा हो।
