राजा का सपना और बीरबल का जवाब

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एक रात बादशाह अकबर बहुत अजीब सपना देखकर जाग उठे। सपने में उन्होंने एक बड़ी तराजू देखी। तराजू के एक पलड़े पर उनका पूरा राज्य रखा था — तख्त, ताज, सोना, खजाना, सब कुछ। दूसरे पलड़े पर सिर्फ़ एक छोटी-सी सफ़ेद पंखड़ी रखी थी। हैरानी की बात यह थी कि वह छोटी पंखड़ी राज्य से भी भारी पड़ रही थी। राज्य वाला पलड़ा ऊपर उठ गया था।

अकबर की नींद उड़ गई। सुबह होते ही उन्होंने दरबार बुलाया और सपना सबको सुनाया। फिर पूछा, “बताओ, इस सपने का क्या मतलब है?”

दरबारी एक-एक करके बोलने लगे। कोई बोला, “हुजूर, आपकी दया राज्य से बड़ी है।” कोई बोला, “आपकी कीर्ति पंखड़ी की तरह हल्की और ऊँची उड़ती है।” सब तारीफ़ के जवाब दे रहे थे।

बीरबल चुपचाप खड़े मुस्कुरा रहे थे। अकबर ने उनसे पूछा, “बीरबल, तुम कुछ क्यों नहीं बोल रहे? तुम्हारा जवाब क्या है?”

बीरबल ने हाथ जोड़कर कहा, “जहाँपनाह, सपना बहुत साफ़ कह रहा है। राज्य, तख्त और सोना बड़े दिखते हैं, लेकिन अगर इंसान के दिल में सच्चाई, दया और ईमानदारी जैसी छोटी-सी बात न हो, तो सारा राज्य हल्का पड़ जाता है। वह छोटी पंखड़ी आपके अंदर की अच्छी बातों की तरह है। सपना आपको याद दिला रहा है कि असली वजन ताकत का नहीं, अच्छे गुणों का होता है।”

दरबार में सन्नाटा छा गया। फिर अकबर धीरे-से मुस्कुराए। उन्होंने कहा, “बीरबल, तुम्हारा जवाब सबसे प्यारा और सच्चा है। सपने ने मुझे घमंड से बचा लिया।”

उस दिन के बाद अकबर अक्सर कहा करते थे, “कभी-कभी सबसे छोटा जवाब सबसे बड़ा सबक दे जाता है।”

नैतिक शिक्षा: बड़ी ताकत और धन से ज्यादा कीमती होते हैं छोटे-छोटे अच्छे गुण — जैसे सच्चाई, दया और ईमानदारी।

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