
एक दिन दरबार में एक चमकदार कपड़ों वाला व्यापारी आया। उसके हाथ में एक सुंदर पिटारी थी। उसने अकबर को प्रणाम किया और बोला, “जहाँपनाह, मैं एक अनोखा व्यापारी हूँ। मेरे पास ऐसी मुर्गी है जो हर सुबह एक सोने का अंडा देती है। अगर आप चाहें तो मैं वह मुर्गी आपको बेच सकता हूँ।”
अकबर की आँखें चमक उठीं। उन्होंने पूछा, “सच? सोने का अंडा?”
व्यापारी ने पिटारी खोली और एक चमकता हुआ सुनहरा अंडा निकालकर दिखाया। दरबार में सब हैरान रह गए। कई दरबारी फुसफुसाने लगे, “यह तो कमाल की चीज़ है!”
बीरबल चुपचाप मुस्कुरा रहे थे। उन्होंने कहा, “हुजूर, सोने का अंडा वाकई कीमती है। लेकिन क्या हम एक रात के लिए इस मुर्गी को अपने पास रख सकते हैं? सुबह सबके सामने अंडा देने का चमत्कार देखें।”
व्यापारी थोड़ा हिचकिचाया, लेकिन मना नहीं कर सका। मुर्गी महल के एक कमरे में रख दी गई। बीरबल ने रात भर चुपचाप पहरा दिया।
आधी रात को व्यापारी चुपके से कमरे में घुसा। उसने अपनी झोली से एक और सुनहरा अंडा निकाला और मुर्गी के नीचे रख दिया। ठीक उसी समय बीरबल ने दिया जलाया।
व्यापारी काँप उठा। बीरबल ने हँसते हुए कहा, “अरे व्यापारी जी! मुर्गी तो सोने का अंडा देती नहीं, आप ही रात में अंडा रख जाते हो।”
सुबह दरबार में बीरबल ने सारी बात बताई। उन्होंने अंडे को तोड़कर दिखाया — अंदर साधारण अंडा था, ऊपर सिर्फ़ सोने की पतली परत चढ़ाई गई थी।
अकबर जोर से हँसे और बोले, “बीरबल, तुमने फिर लालच के जाल को तोड़ दिया!”
व्यापारी ने माफी माँगी। अकबर ने उसे हल्की सज़ा दी और कहा कि अब से ईमानदारी से व्यापार करे। सोने की परत वाले अंडे वापस ले लिए गए और असली दाम पर सोना बेचने का हुक्म दिया गया।
नैतिक शिक्षा: लालच में आकर झूठे चमत्कार दिखाने वाले एक दिन ज़रूर पकड़े जाते हैं। सच्ची कमाई ईमानदारी से ही होती है।
