
एक दिन महल की रसोई में से एक छोटी-सी मिठाई गायब हो गई। रसोइए ने शिकायत की कि महल का एक छोटा नौकर लड़का, जिसका नाम टुनटुन था, बिना पूछे वह मिठाई ले गया है।
बादशाह अकबर को जब पता चला तो वे नाराज़ हो गए। उन्होंने टुनटुन को दरबार में बुलाया और बोले, “तुमने चोरी की है। तुम्हें सज़ा मिलेगी।”
टुनटुन डरा-डरा सा खड़ा था। उसकी आँखों में आँसू आ गए। वह सिर्फ़ दस-ग्यारह साल का था।
बीरबल आगे आए और धीरे से बोले, “हुजूर, गलती छोटी है, इसलिए सज़ा भी सबसे छोटी होनी चाहिए। अगर इजाज़त दें तो मैं खुद वह सज़ा तय करूँ?”
अकबर ने सहमति दे दी। बीरबल ने मुस्कुराते हुए टुनटुन से कहा, “बेटा, तुम्हारी सज़ा यह है — तुम इस दरबार में घूमोगे और हर एक व्यक्ति के पास जाकर विनम्रता से बोलोगे, ‘मैंने बिना पूछे एक मिठाई ली थी। मुझे माफ़ करना।’ बस इतना ही। और वह मिठाई तुम अपनी खुली हथेली पर रखकर घूमोगे।”
टुनटुन ने सिर झुकाया और सज़ा शुरू की। वह एक-एक दरबारी के पास गया। कुछ लोग मुस्कुराए, कुछ ने प्यार से सिर थपथपाया, कुछ ने कहा “अब मत करना।” मिठाई उसकी हथेली पर रखी थी। वह जितना घूमता गया, उतना ही उसका सिर झुकता गया। छोटी-सी गलती अब उसे बहुत भारी लगने लगी थी।
जब उसने सारे दरबार में घूमकर माफी माँग ली, तो बीरबल ने उसे वापस बुलाया और कहा, “अब बताओ, कैसी लगी यह छोटी सज़ा?”
टुनटुन की आँखें भर आईं। उसने धीरे से कहा, “बीरबल चाचा, यह सज़ा छोटी लगती थी, पर बहुत बड़ी लगी। अब मैं कभी बिना पूछे कुछ नहीं लूँगा।”
अकबर हैरान रह गए। उन्होंने बीरबल की ओर देखा और बोले, “बीरबल, तुमने सबसे छोटी सज़ा देकर सबसे बड़ा पाठ सिखा दिया।”
पूरे दरबार में हल्की हँसी और प्यार का माहौल छा गया। टुनटुन को माफ़ कर दिया गया और उस दिन के बाद वह हमेशा इजाज़त माँगकर ही कुछ लेता था।
नैतिक शिक्षा: कभी-कभी सबसे छोटी सज़ा भी दिल तक पहुँच जाती है और बड़ी सज़ा से ज्यादा सिखा देती है।
