
एक शाम महल की रसोई से बड़ी अजीब शिकायत आई। रसोइए ने कहा, “जहाँपनाह, पिछले तीन दिनों से हर रात रसोई से मीठे पकवान गायब हो रहे हैं। ताले लगे होते हैं, पहरेदार होते हैं, फिर भी चीज़ें गायब!”
अकबर नाराज़ हो गए। उन्होंने बीरबल को बुलाया और कहा, “बीरबल, यह रहस्य सुलझाओ।”
बीरबल ने शांति से जवाब दिया, “हुजूर, मुझे बस एक रात की जांच का समय दीजिए। सुबह तक बात साफ़ हो जाएगी।”
रात हुई। बीरबल ने रसोई के पास एक अंधेरे कोने में चुपचाप बैठने की जगह बनाई। उन्होंने दीया नहीं जलाया। सिर्फ़ आँखें और कान खुले रखें।
आधी रात का समय था। अचानक हल्की सी आहट हुई। बीरबल ने ध्यान से देखा। एक छोटी सी छाया रसोई की खिड़की की तरफ़ बढ़ रही थी। छाया ने धीरे से खिड़की खोली और अंदर हाथ बढ़ाया।
बीरबल ने तुरंत दीया जलाया। रोशनी होते ही सब देखकर हैरान रह गए — चोर कोई नौकर या पहरेदार नहीं, बल्कि महल का छोटा सा पालतू बंदर था! वह हर रात खिड़की से अंदर घुसकर मीठे पकवान उठा ले जाता था।
बंदर को देखकर बीरबल मुस्कुरा दिए। उन्होंने बंदर को प्यार से पकड़ा और सुबह दरबार में पेश किया।
अकबर और सभी दरबारी जोर से हँस पड़े। अकबर ने कहा, “बीरबल, तुमने एक रात की जांच में पूरा रहस्य सुलझा दिया! और वह भी बिना किसी को सज़ा दिए।”
बीरबल बोले, “हुजूर, कभी-कभी अपराधी कोई बुरा आदमी नहीं, बल्कि एक शरारती मासूम होता है। सही जांच से सच्चाई निकल आती है।”
उस दिन के बाद रसोई की खिड़कियाँ और सुरक्षित कर दी गईं और बंदर को मीठे फल खाने के लिए अलग से जगह बना दी गई।
नैतिक शिक्षा: जल्दी निष्कर्ष निकालने से बेहतर है कि धैर्य रखकर सही जांच की जाए। सच्चाई अक्सर एक रात की मेहनत में छिपी होती है।
