चांद को बेचने वाला व्यापारी

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एक दिन दरबार में एक चमकदार कपड़ों वाला व्यापारी आया। उसने बड़े गर्व से अकबर को प्रणाम किया और बोला, “जहाँपनाह, मैं बहुत अनोखा व्यापारी हूँ। मैंने कई चीज़ें बेची हैं, लेकिन आज मैं आपको चांद बेचना चाहता हूँ।”

दरबार में हँसी की लहर दौड़ गई। अकबर भी मुस्कुराए और बोले, “चांद? तुम चांद कैसे बेचोगे?”

व्यापारी ने गंभीर चेहरा बनाते हुए कहा, “हुजूर, मैं चांद का मालिक हूँ। अगर आप एक लाख सोने के सिक्के दें तो मैं चांद आपको बेच दूँगा। रात को वह आपके महल के ऊपर ही चमकेगा।”

कुछ दरबारी हैरान थे, कुछ हँस रहे थे। अकबर ने बीरबल की ओर देखा।

बीरबल आगे आए और शांति से बोले, “व्यापारी जी, चांद बेचना बहुत बड़ी बात है। लेकिन पहले बताइए — चांद आपका है, इसका सबूत क्या है?”

व्यापारी बोला, “मैंने इसे बहुत पहले खरीद लिया था। मेरे पास कागज़ है।”

बीरबल ने मुस्कुराते हुए कहा, “अच्छा। तो फिर मेरा एक छोटा सा सवाल है। अगर चांद आपका है, तो क्या आप उसे यहाँ अदालत में पेश कर सकते हैं? या फिर उसे तराजू पर तौल सकते हैं?”

व्यापारी चुप हो गया।

बीरबल ने फिर कहा, “और एक बात — चांद तो हर रात पूरी दुनिया के लोगों को रोशनी देता है। अगर आप उसे बेच देंगे, तो बाकी लोग अँधेरे में क्या करेंगे? क्या आपने उनसे इजाज़त ली है?”

अब व्यापारी का चेहरा लाल हो गया। वह हकलाते हुए बोला, “मैं… मैं तो मज़ाक कर रहा था।”

अकबर जोर से हँसे और बोले, “बीरबल, तुमने फिर कमाल कर दिया! चांद किसी एक का नहीं हो सकता।”

बीरबल ने व्यापारी से कहा, “भाई साहब, जो चीज़ सबकी है, उसे कोई बेच नहीं सकता। बेहतर है कि आप ईमानदारी का व्यापार करो।”

व्यापारी ने शर्मिंदगी से माफी माँगी और चला गया। उस दिन के बाद वह कभी अनोखी-अनोखी बातें बनाने के बजाय सीधा व्यापार करने लगा।

नैतिक शिक्षा: जो चीज़ सबकी साझी है, उसे कोई अकेला बेच या खरीद नहीं सकता। सच्चा व्यापार ईमानदारी पर चलता है।

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